रविवार, 16 अक्टूबर 2011

700   करोड़   के    पार्क     के   बजाय  एक अदद बिजलीघर या कारखाना भी लगाया जा सकता था . पार्क  से दलितों का भला होने से  रहा .हाँ पार्क  में घुमने से  अभिजात्यपन महसूस   किया जा    सकता    है    . यह खुद को स्थापित करने  की होड़ है या   भावी     पीढ़ी   के  प्रति   अविश्वास या   अपने किये गए कार्यों   के   प्रति   संदेह ??? 

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

ग़रीब

दुनिया के मजदूरों एक हो कहने वाले 
मार्क्स 
अब तनी हुई मुट्ठियाँ ढूंढते रह जायेंगे 
ये सरकार है भईया...
ये गरीबों को भी 
अब अमीर कहलावायेंगे...

सरकार ने गरीबी की परिभाषा बदल डाली है 
बत्तीस रूपये कमाने वाले की अब हर रोज दिवाली है 
गरीबों की तकदीर एक दिन इतनी बदल जाएगी 
सरकार इनका खाता स्विस बैंक में खुलवाएगी

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

आम आदमी

दिख जाता है हर गली हर नुक्कड़ पर 
चेहरे की बेबसी छुपाये ....
आम  आदमी  
कितना निरीह 
जीवन के थपेड़े  सहता हुआ 
खुद को घसीटता
आम आदमी  ...
ता-उम्र  टूटता
जुड़ता हुआ .....
अदम्य जिजीविषा लिए
आम आदमी .

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

sapne

दरक   रहा है भीतर कुछ
बार-बार ....लगातार 
बार -बार वह खुद को तोड़ती 
जोड़ने में लगी है, सपने
दूसरों के ...
अपनी बारी के इंतजार में 
कभी तो पूरे होंगे , सपने 
जो देखे थे बचपन से ....
जीवन के गणित में  उलझी ...
बुनते हुए सपने .....
अनजान है इस बात से कि 
उसकी परिणति 
दूसरों  के सपने पूरे होते 
देख कर खुश होने में है .

शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

कुछ लोग  विचार  बेचते हैं 
.लोग झंडो तले खड़े हैं विचार लिए
विविध रंगों   के झंडे 
विचार  रंगों   में बदल रहे  हैं 

 
 

शुक्रवार, 27 मई 2011

उपजाऊ जमीन के बदले विकास नही चाहिए 
 अन्नदाता के बदले करदाता नही चाहिए 
बखार के बदले  माल नही चाहिए (भट्टा पारसौल, सिंगुर,नंदीग्राम  के सन्दर्भ में )

शुक्रवार, 22 अप्रैल 2011

शनिवार, 6 नवंबर 2010

???

ओबामा जी का स्वागत है . भारत आये हैं तो कुछ सोच कर ही आये होंगे. वर्ना उनके आगे हमारी बिसात क्या है, तभी तो भारत की सुरक्षा एजेंसियों पर उनको भरोसा नही है. अमेरिका से सब तामझाम ले कर आये हैं. हम शर्मिंदा हैं की हम उनकी सुरक्षा भी नही कर सकते . चलिए कुछ तो सबक सीखना होगा इन साहेब से.अपनी सुरक्षा अपने हाथ.हमारा कुछ काम तो कम कर दिया . खैर, जबसे आने की खबर सुनी थी यही सोच रही थी की आये क्यों हैं?? जवाब हो किसी के पास तो हमे भी बता देना...खैर.मेरी समझ काम हो सकती है पर यही लगता है परमाणु  संधि पर ही  कोई अहम्  बात होगी.कोई अपने (अमेरिका)हित की बात ही होगी..

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

चेहरा

कहते हैं  चेहरा आईना होता है
पर ...
आज-कल के आइनों से संभल  कर रहना
आईने झूठ भी बोला करते हैं.

शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

चिठ्ठियाँ

( 1 )
भारत में सबसे ज्यादा डाक घर .....
क्या चिठ्ठियाँ अभी भी लिखी जाती हैं ???



( 2 )
आज भी याद है जब  बचपन में नानी हमें  चिठ्ठी लिखा करती थीं,पढ़ के  आँखों में आंसू भर जाया  करते थे और  हम  गर्मी  की छुट्टियों का इंतजार करते थे कि कब जल्दी से दिन बीते ,पढाई ख़तम हो और हम गाँव पहुँच जाएँ .